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महाभारत 66.3

शिवेन ध्याहि मां ब्रह्मन्स्वस्ति चैव वदस्व मे
भवत्प्रसादादिच्छामि प्रवेष्टुं दुर्भिदां चमूम्

पूरा अध्याय