ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 5757.22महाभारत 57.22केशवेन गृहीतः स दक्षिणे विभुना भुजे प्रेक्षमाणो बहून्भावाञ्जगामाद्भुतदर्शनान्पिछलाअगलापूरा अध्याय