ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 5555.14महाभारत 55.14अद्य पश्यामि पृथिवीं शून्यामिव हतत्विषम् अभिमन्युमपश्यन्ती शोकव्याकुललोचनापिछलाअगलापूरा अध्याय