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महाभारत 48.50

महाभया वैतरणीव दुस्तरा; प्रवर्तिता योधवरैस्तदा नदी
उवाह मध्येन रणाजिरं भृशं; भयावहा जीवमृतप्रवाहिनी

पूरा अध्याय