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महाभारत 48.44

हतेश्वरैश्चूर्णितपत्त्युपस्करै;र्हताश्वसूतैर्विपताककेतुभिः
महारथैर्भूः शुशुभे विचूर्णितैः; पुरैरिवामित्रहतैर्नराधिप

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