Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 31.77

ततो बले भृशलुलिते परस्परं; निरीक्षमाणे रुधिरौघसंप्लुते
दिवाकरेऽस्तंगिरिमास्थिते शनै;रुभे प्रयाते शिबिराय भारत

पूरा अध्याय