ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 3131.23महाभारत 31.23निर्मर्यादं महद्युद्धमवर्तत सुदारुणम् हा तात हा पुत्र सखे क्वासि तिष्ठ क्व धावसिपिछलाअगलापूरा अध्याय