ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 173173.23महाभारत 173.23भास्कराय सुतीर्थाय देवदेवाय रंहसे बहुरूपाय शर्वाय प्रियाय प्रियवाससेपिछलाअगलापूरा अध्याय