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महाभारत 172.15

दृश्यादृश्यानरिगणानुद्दिश्याचार्यनन्दनः
सोऽभिमन्त्र्य शरं दीप्तं विधूममिव पावकम्
सर्वतः क्रोधमाविश्य चिक्षेप परवीरहा

पूरा अध्याय