ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 171171.51महाभारत 171.51स भिन्नकवचः शूरस्तोत्त्रार्दित इव द्विपः विमुच्य सशरं चापं भूरिव्रणपरिस्रवःपिछलाअगलापूरा अध्याय