ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 170170.26महाभारत 170.26धृष्टद्युम्न पलायस्व सह पाञ्चालसेनया सात्यके त्वं च गच्छस्व वृष्ण्यन्धकवृतो गृहान्पिछलाअगलापूरा अध्याय