ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 166166.42महाभारत 166.42न पार्षतो दुरात्मासौ न शिखण्डी न सात्यकिः यदिदं मयि कौरव्य सकल्यं सनिवर्तनम्पिछलाअगलापूरा अध्याय