ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 158158.24महाभारत 158.24उत्तिष्ठ राजन्युध्यस्व वह गुर्वीं धुरं विभो त्वयि वैक्लव्यमापन्ने संशयो विजये भवेत्पिछलाअगलापूरा अध्याय