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महाभारत 154.56

दृष्ट्वा शक्तिं कर्णबाह्वन्तरस्थां; नेदुर्भूतान्यन्तरिक्षे नरेन्द्र
ववुर्वातास्तुमुलाश्चापि राज;न्सनिर्घाता चाशनिर्गां जगाम

पूरा अध्याय