ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 145145.39महाभारत 145.39तेन बाणेन निर्विद्धो वृषसेनो विशां पते न्यपतत्स रथे मूढो धनुरुत्सृज्य वीर्यवान्पिछलाअगलापूरा अध्याय