Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 135.35

निर्दहन्निव चक्षुर्भ्यां पार्षतं सोऽभ्यवैक्षत
छादयामास च शरैर्निःश्वसन्पन्नगो यथा

पूरा अध्याय