ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 133133.19महाभारत 133.19अब्रुवन्कर्ण युध्यस्व बहु कत्थसि सूतज अनुक्त्वा विक्रमेद्यस्तु तद्वै सत्पुरुषव्रतम्पिछलाअगलापूरा अध्याय