ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 131131.88महाभारत 131.88दारितान्द्रौणिना बाणैर्भृशं विक्षतविग्रहान् जहि मातुल कौन्तेयानसुरानिव पावकिःपिछलाअगलापूरा अध्याय