Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 131.42

वेगेन महता गच्छद्विक्षिप्तं द्रौणिना शरैः
अभाग्यस्येव संकल्पस्तन्मोघं न्यपतद्भुवि

पूरा अध्याय