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महाभारत 131.118

क्षिप्तैः काञ्चनदण्डैश्च नृपच्छत्रैः क्षितिर्बभौ
द्यौरिवोदितचन्द्रार्का ग्रहाकीर्णा युगक्षये

पूरा अध्याय