ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 122122.54महाभारत 122.54मित्रार्थे तौ पराक्रान्तौ स्पर्धिनौ शुष्मिणौ रणे कर्णश्चामरसंकाशो युयुधानश्च सात्यकिःपिछलाअगलापूरा अध्याय