ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 122122.20महाभारत 122.20शोचयत्येष निपतन्भूयः पुत्रवधाद्धि माम् कृपणं स्वरथे सन्नं पश्य कृष्ण यथा गतम्पिछलाअगलापूरा अध्याय