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महाभारत 120.78

मद्रराजस्तु कौन्तेयमविध्यत्त्रिंशता शरैः
शारद्वतस्तु विंशत्या वासुदेवं समार्पयत्
धनंजयं द्वादशभिराजघान शिलीमुखैः

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