ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 118118.8महाभारत 118.8न प्रमत्ताय भीताय विरथाय प्रयाचते व्यसने वर्तमानाय प्रहरन्ति मनस्विनःपिछलाअगलापूरा अध्याय