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महाभारत 117.1

संजय उवाच
तमापतन्तं संप्रेक्ष्य सात्वतं युद्धदुर्मदम्
क्रोधाद्भूरिश्रवा राजन्सहसा समुपाद्रवत्

पूरा अध्याय