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महाभारत 115.19

निहत्य तं पार्थिवपुत्रपौत्रं; संख्ये मधूनामृषभः प्रमाथी
ततोऽन्वयादर्जुनमेव वीरः; सैन्यानि राजंस्तव संनिवार्य

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