ग्रंथमहाभारतद्रोणपर्वअध्याय 114114.39महाभारत 114.39तयोर्विसृजतोस्तत्र शरजालानि मारिष वायुभूतान्यदृश्यन्त संसक्तानीतरेतरम्पिछलाअगलापूरा अध्याय