ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 9797.47महाभारत 97.47शैनेयं स तु निर्भिद्य प्राविशद्धरणीतलम् वसन्तकाले बलवान्बिलं सर्पशिशुर्यथापिछलाअगलापूरा अध्याय