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महाभारत 81.23

आज्ञायमानेऽपि धनंजयेन; महाहवे संप्रसक्ते नृवीर
कथं हि भीष्मात्प्रथितः पृथिव्यां; भयं त्वमद्य प्रकरोषि वीर

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