ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 6565.30महाभारत 65.30शिखण्डी तु समासाद्य द्रोणं शस्त्रभृतां वरम् अवर्जयत संग्रामे युगान्ताग्निमिवोल्बणम्पिछलाअगलापूरा अध्याय