ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 6161.52महाभारत 61.52निसर्गसर्गाभिरत कामेश परमेश्वर अमृतोद्भव सद्भाव युगाग्ने विजयप्रदपिछलाअगलापूरा अध्याय