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महाभारत 60.1

संजय उवाच
ततो भूरिश्रवा राजन्सात्यकिं नवभिः शरैः
अविध्यद्भृशसंक्रुद्धस्तोत्त्रैरिव महाद्विपम्

पूरा अध्याय