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महाभारत 56.5

सा वाहिनी शांतनवेन राज्ञा; महारथैर्वारणवाजिभिश्च
बभौ सविद्युत्स्तनयित्नुकल्पा; जलागमे द्यौरिव जातमेघा

पूरा अध्याय