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महाभारत 55.97

निगृह्यमाणश्च तदादिदेवो; भृशं सरोषः किल नाम योगी
आदाय वेगेन जगाम विष्णु;र्जिष्णुं महावात इवैकवृक्षम्

पूरा अध्याय