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महाभारत 55.122

वेगेन सातीव पृथुप्रवाहा; प्रसुस्रुता भैरवारावरूपा
परेतनागाश्वशरीररोधा; नरान्त्रमज्जाभृतमांसपङ्का

पूरा अध्याय