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महाभारत 46.43

इन्द्रायुधसवर्णाभिः पताकाभिरलंकृतः
आकाशग इवाकाशे गन्धर्वनगरोपमः
नृत्यमान इवाभाति रथचर्यासु मारिष

पूरा अध्याय