ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 4343.60महाभारत 43.60शकुनिः प्रतिविन्ध्यं तु पराक्रान्तं पराक्रमी अभ्यद्रवत राजेन्द्र मत्तो मत्तमिव द्विपम्पिछलाअगलापूरा अध्याय