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महाभारत 41.79

युधिष्ठिर उवाच
मन्त्रयस्व महाराज नित्यं मद्धितमुत्तमम्
कामं युध्य परस्यार्थे वरमेतद्वृणोम्यहम्

पूरा अध्याय