ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 4040.53महाभारत 40.53अहंकारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम् विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पतेपिछलाअगलापूरा अध्याय