ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 4040.37महाभारत 40.37यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम् तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम्पिछलाअगलापूरा अध्याय