Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 33.31

आख्याहि मे को भवानुग्ररूपो; नमोऽस्तु ते देववर प्रसीद
विज्ञातुमिच्छामि भवन्तमाद्यं; न हि प्रजानामि तव प्रवृत्तिम्

पूरा अध्याय