ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 1818.5महाभारत 18.5तत्र नागा रथाश्चैव जाम्बूनदविभूषिताः भ्राजमाना व्यदृश्यन्त मेघा इव सविद्युतःपिछलाअगलापूरा अध्याय