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महाभारत 116.36

ततः श्रुत्वा तद्वचः कौरवेन्द्रो; दुर्योधनो दीनमना बभूव
तमब्रवीच्छांतनवोऽभिवीक्ष्य; निबोध राजन्भव वीतमन्युः

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