ग्रंथमहाभारतभीष्मपर्वअध्याय 112112.84महाभारत 112.84एवमुक्तस्तु पार्थेन शिखण्डी भरतर्षभ शरैर्नानाविधैस्तूर्णं पितामहमुपाद्रवत्पिछलाअगलापूरा अध्याय