Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 112.79

शिखण्डिनं तु गाङ्गेयः क्रोधदीप्तेन चक्षुषा
अवैक्षत कटाक्षेण निर्दहन्निव भारत

पूरा अध्याय