Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 110.39

शिखण्डी तु समासाद्य भारतानां पितामहम्
अभ्यद्रवत संहृष्टो भयं त्यक्त्वा यतव्रतम्

पूरा अध्याय