Utshovऐप डाउनलोड करें

महाभारत 101.15

वेगवद्भिर्हयैस्तैस्तु क्षोभितं पाण्डवं बलम्
निपतद्भिर्महावेगैर्हंसैरिव महत्सरः
हेषतां चैव शब्देन न प्राज्ञायत किंचन

पूरा अध्याय