ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 9797.10महाभारत 97.10उदये नित्यशश्चात्र चन्द्रमा रश्मिभिर्वृतः अमृतं स्पृश्य संस्पर्शात्संजीवयति देहिनःपिछलाअगलापूरा अध्याय