ग्रंथमहाभारतउद्योगपर्वअध्याय 9595.19महाभारत 95.19भार्यया तु स संमन्त्र्य सह रात्रौ सुधर्मया मातलिर्नागलोकाय चकार गमने मतिम्पिछलाअगलापूरा अध्याय