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महाभारत 94.10

प्रतिषिध्यमानोऽप्यसकृत्पृच्छत्येव स वै द्विजान्
अभिमानी श्रिया मत्तस्तमूचुर्ब्राह्मणास्तदा

पूरा अध्याय